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सहीह मुस्लिम

नंबर 222

नंबर 222किताब 1, नंबर 128अरबी नंबरिंग 64.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَابْنُ الْمُثَنَّى، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جَعْفَرٍ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ مَنْصُورٍ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا عَفَّانُ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنِ الأَعْمَشِ، كِلاَهُمَا عَنْ أَبِي وَائِلٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِمِثْلِهِ ‏.‏
Abu Bakr b. Abu Shaiba narrated a hadith like this from the Apostle (may peace and blessings be upon him) on the authority of Abdullah

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।