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सहीह मुस्लिम

नंबर 218

नंबर 218किताब 1, नंबर 124अरबी नंबरिंग 62
حَدَّثَنِي هَارُونُ بْنُ سَعِيدٍ الأَيْلِيُّ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي عَمْرٌو، عَنْ جَعْفَرِ بْنِ رَبِيعَةَ، عَنْ عِرَاكِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تَرْغَبُوا عَنْ آبَائِكُمْ فَمَنْ رَغِبَ عَنْ أَبِيهِ فَهُوَ كُفْرٌ ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the authority of Abu Huraira that the Messenger of Allah (may peace and blessings be upon him) observed:Do not detest your fathers; he who detested his father committed infidelity

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।