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सहीह मुस्लिम

नंबर 213

नंबर 213किताब 1, नंबर 119अरबी नंबरिंग 59.03
حَدَّثَنَا عُقْبَةُ بْنُ مُكْرَمٍ الْعَمِّيُّ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ قَيْسٍ أَبُو زُكَيْرٍ، قَالَ سَمِعْتُ الْعَلاَءَ بْنَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، يُحَدِّثُ بِهَذَا الإِسْنَادِ وَقَالَ ‏ "‏ آيَةُ الْمُنَافِقِ ثَلاَثٌ وَإِنْ صَامَ وَصَلَّى وَزَعَمَ أَنَّهُ مُسْلِمٌ ‏"‏ ‏.‏
Uqba b. Mukarram al-'Ami reported that he heard 'Ala' b. 'Abdur-Rahman narrating this hadith with this chain of transmitters and he said:Three are the signs of a hypocrite, even if he observed fast and prayed and asserted that he was a Muslim

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।