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सहीह मुस्लिम

नंबर 208

नंबर 208किताब 1, नंबर 115अरबी नंबरिंग 57.07
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ ذَكْوَانَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، رَفَعَهُ قَالَ ‏ "‏ لاَ يَزْنِي الزَّانِي ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ ذَكَرَ بِمِثْلِ حَدِيثِ شُعْبَةَ ‏.‏
Muhammad b. Rafi', Abdur-Razzaq, Sufyan, A'mash narrated this hadith like one narrated by Shu'ba, on the authority of Abu Huraira tracing, it (right to the Holy Prophet)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।