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सहीह मुस्लिम

नंबर 184

नंबर 184किताब 1, नंबर 91अरबी नंबरिंग 52.03
حَدَّثَنِي عَمْرٌو النَّاقِدُ، وَحَسَنٌ الْحُلْوَانِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ، - وَهُوَ ابْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ سَعْدٍ - حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ صَالِحٍ، عَنِ الأَعْرَجِ، قَالَ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَتَاكُمْ أَهْلُ الْيَمَنِ هُمْ أَضْعَفُ قُلُوبًا وَأَرَقُّ أَفْئِدَةً الْفِقْهُ يَمَانٍ وَالْحِكْمَةُ يَمَانِيَةٌ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported:The Messenger of Allah (may peace and blessings be upon him) observed: There came to you the people from Yemen; they are tender of hearts and mild of feelings, the understanding is Yemenite, the sagacity is Yemenite

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।