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सहीह मुस्लिम

नंबर 182

नंबर 182किताब 1, नंबर 89अरबी नंबरिंग 52.01
حَدَّثَنَا أَبُو الرَّبِيعِ الزَّهْرَانِيُّ، أَنْبَأَنَا حَمَّادٌ، حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ جَاءَ أَهْلُ الْيَمَنِ هُمْ أَرَقُّ أَفْئِدَةً الإِيمَانُ يَمَانٍ وَالْفِقْهُ يَمَانٍ وَالْحِكْمَةُ يَمَانِيَةٌ ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the authority of Abu Huraira that the Messenger of Allah observed:There have come the people of Yemen; they are tender of hearts, the belief is that of the Yemenites, the understanding (of the faith) is that of the Yemenites and sagacity is that of the Yemenites

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।