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सहीह मुस्लिम

नंबर 168

नंबर 168किताब 1, नंबर 75अरबी नंबरिंग 44.01
وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ، ح وَحَدَّثَنَا شَيْبَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ، كِلاَهُمَا عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ يُؤْمِنُ عَبْدٌ - وَفِي حَدِيثِ عَبْدِ الْوَارِثِ الرَّجُلُ - حَتَّى أَكُونَ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِنْ أَهْلِهِ وَمَالِهِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ ‏"‏ ‏.‏
It is reported on the authority of Anas that the Messenger of Allah (ﷺ) said:No bondsman believes, and, in the hadith narrated by Abdul Warith, no person believes, till I am dearer to him than the members of his household, his wealth and the whole of mankind

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।