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सहीह मुस्लिम

नंबर 146

नंबर 146किताब 1, नंबर 53अरबी नंबरिंग 30.04
حَدَّثَنَا الْقَاسِمُ بْنُ زَكَرِيَّاءَ، حَدَّثَنَا حُسَيْنٌ، عَنْ زَائِدَةَ، عَنْ أَبِي حَصِينٍ، عَنِ الأَسْوَدِ بْنِ هِلاَلٍ، قَالَ سَمِعْتُ مُعَاذًا، يَقُولُ دَعَانِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَأَجَبْتُهُ فَقَالَ ‏ "‏ هَلْ تَدْرِي مَا حَقُّ اللَّهِ عَلَى النَّاسِ ‏"‏ ‏.‏ نَحْوَ حَدِيثِهِمْ ‏.‏
It is narrated on the authority of Aswad b. Hilal that he heard Mu'adh say this:The Messenger of Allah (ﷺ) called, me and I replied to him. He (the Holy Prophet) said: Do you know the right of Allah upon the people? and then followed the hadith (mentioned above)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।