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सहीह मुस्लिम

नंबर 141

नंबर 141किताब 1, नंबर 48अरबी नंबरिंग 28.02
وَحَدَّثَنِي أَحْمَدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدَّوْرَقِيُّ، حَدَّثَنَا مُبَشِّرُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، عَنْ عُمَيْرِ بْنِ هَانِئٍ، فِي هَذَا الإِسْنَادِ بِمِثْلِهِ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ ‏"‏ أَدْخَلَهُ اللَّهُ الْجَنَّةَ عَلَى مَا كَانَ مِنْ عَمَلٍ ‏"‏ ‏.‏ وَلَمْ يَذْكُرْ ‏"‏ مِنْ أَىِّ أَبْوَابِ الْجَنَّةِ الثَّمَانِيَةِ شَاءَ ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the authority of Umar b. Hani with the same chain of transmitters with the exception of these words:Allah would make him (he who affirms these truths) enter Paradise through one of the eight doors which he would like

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।