सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 136

नंबर 136किताब 1, नंबर 43अरबी नंबरिंग 26.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، كِلاَهُمَا عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، - قَالَ أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا ابْنُ عُلَيَّةَ، - عَنْ خَالِدٍ، قَالَ حَدَّثَنِي الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، عَنْ حُمْرَانَ، عَنْ عُثْمَانَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ مَاتَ وَهُوَ يَعْلَمُ أَنَّهُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ دَخَلَ الْجَنَّةَ ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the authority of 'Uthman that the Messenger of Allah (ﷺ) said. He who died knowing (fully well) that there is no god but Allah entered Paradise

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।