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सहीह मुस्लिम

नंबर 133

नंबर 133किताब 1, नंबर 40अरबी नंबरिंग 24.02
وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، قَالاَ أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، ح وَحَدَّثَنَا حَسَنٌ الْحُلْوَانِيُّ، وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ، - وَهُوَ ابْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ سَعْدٍ - قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ صَالِحٍ، كِلاَهُمَا عَنِ الزُّهْرِيِّ، بِهَذَا الإِسْنَادِ مِثْلَهُ غَيْرَ أَنَّ حَدِيثَ صَالِحٍ انْتَهَى عِنْدَ قَوْلِهِ فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ فِيهِ ‏.‏ وَلَمْ يَذْكُرِ الآيَتَيْنِ ‏.‏ وَقَالَ فِي حَدِيثِهِ وَيَعُودَانِ فِي تِلْكَ الْمَقَالَةِ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ مَعْمَرٍ مَكَانَ هَذِهِ الْكَلِمَةِ فَلَمْ يَزَالاَ بِهِ ‏.‏
The same hadith is mentioned through a different chain except it ends where it mentions that Allah revealed the verses and it does not mention the verses. There is also a slight variation in words

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।