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सहीह मुस्लिम

नंबर 122

नंबर 122किताब 1, नंबर 30अरबी नंबरिंग 19.02
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ السَّرِيِّ، حَدَّثَنَا زَكَرِيَّاءُ بْنُ إِسْحَاقَ، ح وَحَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ، عَنْ زَكَرِيَّاءَ بْنِ إِسْحَاقَ، عَنْ يَحْيَى بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ صَيْفِيٍّ، عَنْ أَبِي مَعْبَدٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم بَعَثَ مُعَاذًا إِلَى الْيَمَنِ فَقَالَ ‏ "‏ إِنَّكَ سَتَأْتِي قَوْمًا ‏"‏ بِمِثْلِ حَدِيثِ وَكِيعٍ ‏.‏
The above hadith has been mentioned with a different chain with a slightly different wording at the beginning, then follows the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।