सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 105

नंबर 105किताब 1, नंबर 13अरबी नंबरिंग 13.02
وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ، وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ بِشْرٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا بَهْزٌ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَوْهَبٍ، وَأَبُوهُ، عُثْمَانُ أَنَّهُمَا سَمِعَا مُوسَى بْنَ طَلْحَةَ، يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي أَيُّوبَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِمِثْلِ هَذَا الْحَدِيثِ ‏.‏
This hadith is transmitted by Muhammad b. Hatim on the authority of Abu Ayyub Ansari

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।