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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 425

नंबर 425किताब 9, नंबर 100
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، بَنَى رَحْبَةً فِي نَاحِيَةِ الْمَسْجِدِ تُسَمَّى الْبُطَيْحَاءَ وَقَالَ مَنْ كَانَ يُرِيدُ أَنْ يَلْغَطَ أَوْ يُنْشِدَ شِعْرًا أَوْ يَرْفَعَ صَوْتَهُ فَلْيَخْرُجْ إِلَى هَذِهِ الرَّحْبَةِ ‏.‏
Yahya related to me from Malik that he had heard that Umar ibn al-Khattab set aside an area near the mosque called al-Butayha and said, "Whoever wishes to talk nonsense or recite poetry or raise his voice should go to that area
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf DaifSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Shortening the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।