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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 406

नंबर 406किताब 9, नंबर 81
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ، أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ، كَانَ إِذَا جَاءَ الْمَسْجِدَ - وَقَدْ صَلَّى النَّاسُ - بَدَأَ بِصَلاَةِ الْمَكْتُوبَةِ وَلَمْ يُصَلِّ قَبْلَهَا شَيْئًا ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Rabia ibn Abi Abd ar-Rahman that if Abdullah ibn Umar arrived at the mosque and the people had already prayed, he would begin with the obligatory prayer and not pray anything before it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf Sahih LighairihiSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Shortening the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।