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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 395

नंबर 395किताब 9, नंबर 70
حَدَّثَنِي يَحْيَى، عَنْ مَالِكٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ أَبِي أُمَامَةَ بْنِ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ، أَنَّهُ قَالَ دَخَلَ زَيْدُ بْنُ ثَابِتٍ الْمَسْجِدَ فَوَجَدَ النَّاسَ رُكُوعًا فَرَكَعَ ثُمَّ دَبَّ حَتَّى وَصَلَ الصَّفَّ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Ibn Shihab that Abu Umama ibn Sahl ibn Hunayf said, "Zayd ibn Thabit entered the mosque and found the people in ruku, so he went into ruku and then moved slowly forward until he reached the row
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Shortening the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।