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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 390

नंबर 390किताब 9, नंबर 65
حَدَّثَنِي يَحْيَى، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نَافِعٍ، أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ، كَانَ إِذَا سَجَدَ وَضَعَ كَفَّيْهِ عَلَى الَّذِي يَضَعُ عَلَيْهِ جَبْهَتَهُ ‏.‏ قَالَ نَافِعٌ وَلَقَدْ رَأَيْتُهُ فِي يَوْمٍ شَدِيدِ الْبَرْدِ وَإِنَّهُ لَيُخْرِجُ كَفَّيْهِ مِنْ تَحْتِ بُرْنُسٍ لَهُ حَتَّى يَضَعَهُمَا عَلَى الْحَصْبَاءِ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Nafi that Abdullah ibn Umar used to place his palms flat on the surface where he put his forehead. Nafi said, "I have seen him take his hands out from under his burnus on a very cold day and place them on the ground
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Shortening the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।