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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 346

नंबर 346किताब 9, नंबर 21
حَدَّثَنِي يَحْيَى، عَنْ مَالِكٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، كَانَ إِذَا قَدِمَ مَكَّةَ صَلَّى بِهِمْ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ يَقُولُ يَا أَهْلَ مَكَّةَ أَتِمُّوا صَلاَتَكُمْ فَإِنَّا قَوْمٌ سَفْرٌ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Ibn Shihab from Salim ibn Abdullah from his father that Umar ibn al-Khattab, when he went to Makka, used to lead them in prayer and do two rakas and then say, "People of Makka,complete the prayer, we are a group travelling
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Shortening the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।