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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 338

नंबर 338किताब 9, नंबर 13
حَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نَافِعٍ، عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ، رَكِبَ إِلَى ذَاتِ النُّصُبِ فَقَصَرَ الصَّلاَةَ فِي مَسِيرِهِ ذَلِكَ ‏.‏ قَالَ مَالِكٌ وَبَيْنَ ذَاتِ النُّصُبِ وَالْمَدِينَةِ أَرْبَعَةُ بُرُدٍ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Nafi from Salim ibn Abdullah that Abdullah ibn Umar rode to Dhat an-Nusub and shortened the prayer on the journey. Malik said, "There are four mail-stages between Dhat an-Nusub and Madina
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Shortening the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।