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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 301

नंबर 301किताब 8, नंबर 15
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نَافِعٍ، أَنَّهُ قَالَ قُمْتُ وَرَاءَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ فِي صَلاَةٍ مِنَ الصَّلَوَاتِ وَلَيْسَ مَعَهُ أَحَدٌ غَيْرِي فَخَالَفَ عَبْدُ اللَّهِ بِيَدِهِ فَجَعَلَنِي حِذَاءَهُ ‏.‏
Yahya related to me from Malik that Nafi said, "I stood behind Abdullah ibn Umar in one of the prayers when there was no one else with him, and he reached behind with his hand and placed me beside him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 8 · Prayer in Congregation

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।