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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 291

नंबर 291किताब 8, नंबर 5
حَدَّثَنِي يَحْيَى، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَرْمَلَةَ الأَسْلَمِيِّ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ بَيْنَنَا وَبَيْنَ الْمُنَافِقِينَ شُهُودُ الْعِشَاءِ وَالصُّبْحِ لاَ يَسْتَطِيعُونَهُمَا ‏"‏ ‏.‏ أَوْ نَحْوَ هَذَا ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Abd ar-Rahman ibn Harmala al- Aslami from Said ibn al-Musayyab that the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, said, "What separates us from the hypocrites is being present at isha and subh. They cannot do it," or words to that effect
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 8 · Prayer in Congregation

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।