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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 272

नंबर 272किताब 7, नंबर 19
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نَافِعٍ، أَنَّهُ قَالَ كُنْتُ مَعَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ بِمَكَّةَ وَالسَّمَاءُ مُغِيمَةٌ فَخَشِيَ عَبْدُ اللَّهِ الصُّبْحَ فَأَوْتَرَ بِوَاحِدَةٍ ثُمَّ انْكَشَفَ الْغَيْمُ فَرَأَى أَنَّ عَلَيْهِ لَيْلاً فَشَفَعَ بِوَاحِدَةٍ ثُمَّ صَلَّى بَعْدَ ذَلِكَ رَكْعَتَيْنِ رَكْعَتَيْنِ فَلَمَّا خَشِيَ الصُّبْحَ أَوْتَرَ بِوَاحِدَةٍ ‏.‏
Yahya related to me from Malik that Nafi said, "I was with Abdullah ibn Umar in Makka. The sky was clouded over and Abdullah feared that dawn was approaching so he prayed one raka for witr. Then the clouds cleared and he saw that it was still night, so he made his prayers even with one raka. Then he continued to pray two rakas at a time, until when he feared the approach of dawn, he prayed one raka for witr
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · Tahajjud

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।