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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 263

नंबर 263किताब 7, नंबर 10
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ، قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي بِاللَّيْلِ ثَلاَثَ عَشْرَةَ رَكْعَةً ثُمَّ يُصَلِّي إِذَا سَمِعَ النِّدَاءَ بِالصُّبْحِ رَكْعَتَيْنِ خَفِيفَتَيْنِ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Hisham ibn Urwa from his father that A'isha, umm al-muminin said, "The Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, used to pray thirteen rakas in the night and then would pray two rakas when he heard the adhan for the subh prayer
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · Tahajjud

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।