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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 260

नंबर 260किताब 7, नंबर 7
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ، كَانَ يَقُولُ صَلاَةُ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ مَثْنَى مَثْنَى يُسَلِّمُ مِنْ كُلِّ رَكْعَتَيْنِ ‏.‏
Yahya related to me from Malik that he had heard that Abdullah ibn Umar used to say, "(Voluntary) prayer in both the day and night is two at a time with a taslim after every 2 raka'ahs." Malik said, "That is the custom among us
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · Tahajjud

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।