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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 250

नंबर 250किताब 6, नंबर 5
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ رُومَانَ، أَنَّهُ قَالَ كَانَ النَّاسُ يَقُومُونَ فِي زَمَانِ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ فِي رَمَضَانَ بِثَلاَثٍ وَعِشْرِينَ رَكْعَةً ‏.‏
Yahya related to me from Malik that Yazid ibn Ruman said, "The people used to watch the night in prayer during Ramadan for twenty- three rakas in the time of Umar ibn al-Khattab
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf MunkarSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · Prayer in Ramadan

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।