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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1839

नंबर 1839किताब 57, नंबर 1
حَدَّثَنِي مَالِكٌ، عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ نَارُ بَنِي آدَمَ الَّتِي يُوقِدُونَ جُزْءٌ مِنْ سَبْعِينَ جُزْءًا مِنْ نَارِ جَهَنَّمَ ‏"‏ ‏.‏ فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنْ كَانَتْ لَكَافِيَةً ‏.‏ قَالَ ‏"‏ إِنَّهَا فُضِّلَتْ عَلَيْهَا بِتِسْعَةٍ وَسِتِّينَ جُزْءًا ‏"‏ ‏.‏
Malik related to me from Abu'z-Zinad from al-Araj from Abu Hurayra that the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, said, "The fire of the children of Adam which they kindle is a seventieth part of the fire of Jahannam." They said, "Messenger of Allah, this fire is certainly enough." He said, "That fire is sixty- nine times greater
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 57 · Jahannam

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।