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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1835

नंबर 1835किताब 56, नंबर 25
قَالَ مَالِكٌ وَبَلَغَنِي أَنَّ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍ كَانَ يَقُولُ أَدْرَكْتُ النَّاسَ وَمَا يَعْجَبُونَ بِالْقَوْلِ ‏.‏ قَالَ مَالِكٌ يُرِيدُ بِذَلِكَ الْعَمَلَ إِنَّمَا يُنْظَرُ إِلَى عَمَلِهِ وَلاَ يُنْظَرُ إِلَى قَوْلِهِ ‏.‏
Malik said, "I heard that al-Qasim ibn Muhammad used to say, 'I have seen the people, (i.e. the companions), and they were not impressed by speech.' " Malik said, "He meant that only action and deeds would be looked at, not words
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu HasanSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Speech

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।