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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1816

नंबर 1816किताब 56, नंबर 6
وَحَدَّثَنِي مَالِكٌ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ السَّمَّانِ، أَنَّهُ أَخْبَرَهُ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ قَالَ إِنَّ الرَّجُلَ لَيَتَكَلَّمُ بِالْكَلِمَةِ مَا يُلْقِي لَهَا بَالاً يَهْوِي بِهَا فِي نَارِ جَهَنَّمَ وَإِنَّ الرَّجُلَ لَيَتَكَلَّمُ بِالْكَلَمَةِ مَا يُلْقِي لَهَا بَالاً يَرْفَعُهُ اللَّهُ بِهَا فِي الْجَنَّةِ ‏.‏
Malik related to me from Abdullah ibn Dinar that Abu Salih as- Samman informed him that Abu Hurayra said, "Truly a man utters words to which he attaches no importance, and by them he falls into the fire of Jahannam, and truly a man utters words to which he attaches no importance, and by them Allah raises him into the Garden
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Speech

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।