सीधे कंटेंट पर जाएँ
मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1814

नंबर 1814किताब 56, नंबर 4
وَحَدَّثَنِي مَالِكٌ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، أَنَّ عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ، لَقِيَ خِنْزِيرًا بِالطَّرِيقِ فَقَالَ لَهُ انْفُذْ بِسَلاَمٍ ‏.‏ فَقِيلَ لَهُ تَقُولُ هَذَا لِخِنْزِيرٍ فَقَالَ عِيسَى إِنِّي أَخَافُ أَنْ أُعَوِّدَ لِسَانِي النُّطْقَ بِالسُّوءِ ‏.‏
Malik related to me from Yahya ibn Said that Isa ibn Maryam encountered a pig on the road. He said to it, "Go in peace." Somebody asked, "Do you say this to a pig?" Isa said, "I fear lest I accustom my tongue to evil speech
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Speech

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।