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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1808

नंबर 1808किताब 55, नंबर 1
حَدَّثَنِي مَالِكٌ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ، أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ، قَالَ كُنَّا إِذَا بَايَعْنَا رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى السَّمْعِ وَالطَّاعَةِ يَقُولُ لَنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ فِيمَا اسْتَطَعْتُمْ ‏"‏ ‏.‏
Malik related to me from Abdullah ibn Dinar that Abdullah ibn Umar said, "When we took an oath of allegiance with him to hear and obey, the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, said to us, 'In what you are able
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · The Oath of Allegiance

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।