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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1806

नंबर 1806किताब 54, नंबर 44
حَدَّثَنِي مَالِكٌ، عَنْ نَافِعٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الْعَبْدُ إِذَا نَصَحَ لِسَيِّدِهِ وَأَحْسَنَ عِبَادَةَ اللَّهِ فَلَهُ أَجْرُهُ مَرَّتَيْنِ ‏"‏ ‏.‏
Malik related to me from Nafi from Abdullah ibn Umar that the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, said, "When a slave gives good counsel to his master and worships Allah correctly, he has his reward twice over
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · General Subjects

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।