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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1803

नंबर 1803किताब 54, नंबर 41
حَدَّثَنِي مَالِكٌ، أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لِلْمَمْلُوكِ طَعَامُهُ وَكِسْوَتُهُ بِالْمَعْرُوفِ وَلاَ يُكَلَّفُ مِنَ الْعَمَلِ إِلاَّ مَا يُطِيقُ ‏"‏ ‏.‏
Malik related to me that he heard that Abu Hurayra said that the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, said, "A slave has his food and clothing in the normal manner, and he is only obliged to do such work as he is capable of doing
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · General Subjects

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।