وَحَدَّثَنِي مَالِكٌ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَرْمَلَةَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، أَنَّهُ كَانَ يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " الشَّيْطَانُ يَهُمُّ بِالْوَاحِدِ وَالاِثْنَيْنِ فَإِذَا كَانُوا ثَلاَثَةً لَمْ يَهُمَّ بِهِمْ " .
Malik related to me from Abd ar-Rahman ibn Harmala that Said ibn al-Musayyab heard the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, say, "Shaytan concerns himself with one and two. When there are three, he does not concern himself with them
स्रोत में दर्ज दर्जे
DaifSalim al-Hilali
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।