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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1792

नंबर 1792किताब 54, नंबर 30
وَحَدَّثَنِي مَالِكٌ، أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، أَرَادَ الْخُرُوجَ إِلَى الْعِرَاقِ فَقَالَ لَهُ كَعْبُ الأَحْبَارِ لاَ تَخْرُجْ إِلَيْهَا يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ فَإِنَّ بِهَا تِسْعَةَ أَعْشَارِ السِّحْرِ وَبِهَا فَسَقَةُ الْجِنِّ وَبِهَا الدَّاءُ الْعُضَالُ ‏.‏
Malik related to me that he heard that Umar ibn al-Khattab wanted to go to Iraq, and Kabal-Ahbar said to him, "Do not go there, amir al- muminin. There is nine-tenths of sorcery there and it is the place of the rebellious jinn and the disease which the doctors are unable to cure
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf DaifSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · General Subjects

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।