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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1785

नंबर 1785किताब 54, नंबर 23
وَحَدَّثَنِي مَالِكٌ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، أَنَّهُ قَالَ جَاءَتِ امْرَأَةٌ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ دَارٌ سَكَنَّاهَا وَالْعَدَدُ كَثِيرٌ وَالْمَالُ وَافِرٌ فَقَلَّ الْعَدَدُ وَذَهَبَ الْمَالُ ‏.‏ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ دَعُوهَا ذَمِيمَةً ‏"‏ ‏.‏
Malik related to me that Yahya ibn Said said, "A woman came to the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, and said, 'Messenger of Allah, we moved into a house when our number was great and our wealth was abundant. Now our number has dwindled and the wealth has gone.' The Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, said, 'Leave it as blameworthy
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · General Subjects

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।