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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1760

नंबर 1760किताब 53, नंबर 5
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ إِسْحَاقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّهُ سَمِعَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، وَسَلَّمَ، عَلَيْهِ رَجُلٌ فَرَدَّ عَلَيْهِ السَّلاَمَ ثُمَّ سَأَلَ عُمَرُ الرَّجُلَ كَيْفَ أَنْتَ فَقَالَ أَحْمَدُ إِلَيْكَ اللَّهَ ‏.‏ فَقَالَ عُمَرُ ذَلِكَ الَّذِي أَرَدْتُ مِنْكَ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Ishaq ibn Abdullah ibn Abi Talha that Anas ibn Malik heard Umar ibn al-Khattab return the greeting of a man who greeted him. Then Umar asked the man, "How are you?" He said, "I praise Allah to you." (Ahmadu ilayka Allah) Umar said, "That is what I wanted from you
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 53 · Greetings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।