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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 235

नंबर 235किताब 5, नंबर 11
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، أَنَّهُ سَأَلَ ابْنَ شِهَابٍ عَنِ الْكَلاَمِ، يَوْمَ الْجُمُعَةِ إِذَا نَزَلَ الإِمَامُ عَنِ الْمِنْبَرِ، قَبْلَ أَنْ يُكَبِّرَ، ‏.‏ فَقَالَ ابْنُ شِهَابٍ لاَ بَأْسَ بِذَلِكَ ‏.‏
Yahya related to me from Malik that he asked Ibn Shihab about talking in the jumua after the imam had come down from the mimbar but before he had said the takbir. Ibn Shihab said, "There is no harm in that
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Jumu'a

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।