सीधे कंटेंट पर जाएँ
मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 226

नंबर 226किताब 5, नंबर 2
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّهُ كَانَ يَقُولُ غُسْلُ يَوْمِ الْجُمُعَةِ وَاجِبٌ عَلَى كُلِّ مُحْتَلِمٍ كَغُسْلِ الْجَنَابَةِ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Said ibn Abi Said al-Maqburi that Abu Hurayra used to say, "Doing ghusl as prescribed for major ritual impurity is incumbent (wajib) on the day of jumua on every male who has reached puberty
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Jumu'a

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।