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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1646

नंबर 1646किताब 47, नंबर 14
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تَبَاغَضُوا وَلاَ تَحَاسَدُوا وَلاَ تَدَابَرُوا وَكُونُوا عِبَادَ اللَّهِ إِخْوَانًا وَلاَ يَحِلُّ لِمُسْلِمٍ أَنْ يُهَاجِرَ أَخَاهُ فَوْقَ ثَلاَثِ لَيَالٍ ‏"‏ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Ibn Shihab from Anas ibn Malik that the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, said, "Do not be angry with each other and do not envy each other and do not turn away from each other, and be slaves of Allah, brothers. It is not halal for a muslim to shun his brother for more than three nights
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · Good Character

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।