وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نُعَيْمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْمُجْمِرِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " عَلَى أَنْقَابِ الْمَدِينَةِ مَلاَئِكَةٌ لاَ يَدْخُلُهَا الطَّاعُونُ وَلاَ الدَّجَّالُ
Yahya related to me from Malik from Nuaym ibn Abdullah al-Mujmir that Abu Hurayra said, "The Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, said, 'There are angels at the entries of Madina, and neither plague nor the Dajjal will enter it
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihSalim al-Hilali
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।