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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1582

नंबर 1582किताब 43, नंबर 31
وَحَدَّثَنِي يَحْيَى، عَنْ مَالِكٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَنَّهُ قَالَ مَضَتِ السُّنَّةُ أَنَّ الْعَاقِلَةَ لاَ تَحْمِلُ شَيْئًا مِنْ دِيَةِ الْعَمْدِ إِلاَّ أَنْ يَشَاءُوا ذَلِكَ ‏.‏ وَحَدَّثَنِي يَحْيَى، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، مِثْلَ ذَلِكَ ‏
Yahya related to me from Malik that Ibn Shihab said, "The precedent of the sunna is that the tribe are not liable for any blood- money of an intentional killing unless they wish that." Yahya related to me from Malik from Yahya ibn Said the same as that
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Blood-Money

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।