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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 224

नंबर 224किताब 4, नंबर 3
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ رَجُلاً، سَأَلَ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍ فَقَالَ إِنِّي أَهِمُ فِي صَلاَتِي فَيَكْثُرُ ذَلِكَ عَلَىَّ ‏.‏ فَقَالَ الْقَاسِمُ بْنُ مُحَمَّدٍ امْضِ فِي صَلاَتِكَ فَإِنَّهُ لَنْ يَذْهَبَ عَنْكَ حَتَّى تَنْصَرِفَ وَأَنْتَ تَقُولُ مَا أَتْمَمْتُ صَلاَتِي ‏.‏
Yahya related to me from Malik that he had heard that a man questioned al-Qasim ibn Muhammad saying, "My imagination works in the prayer, and it happens to me a lot." Al-Qasim ibn Muhammad said, "Go on with your prayer, for it will not go away from you until you go away saying, 'I have not completed my prayer
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu DaifSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · Forgetfulness in Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।