सीधे कंटेंट पर जाएँ
मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1487

नंबर 1487किताब 38, नंबर 24
وَحَدَّثَنِي مَالِكٌ، أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ، قَالَ فِي رَجُلٍ هَلَكَ وَتَرَكَ بَنِينَ لَهُ ثَلاَثَةً وَتَرَكَ مَوَالِيَ أَعْتَقَهُمْ هُوَ عَتَاقَةً ثُمَّ إِنَّ الرَّجُلَيْنِ مِنْ بَنِيهِ هَلَكَا وَتَرَكَا أَوْلاَدًا ‏.‏ فَقَالَ سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ يَرِثُ الْمَوَالِيَ الْبَاقِي مِنَ الثَّلاَثَةِ فَإِذَا هَلَكَ هُوَ فَوَلَدُهُ وَوَلَدُ إِخْوَتِهِ فِي وَلاَءِ الْمَوَالِي شَرَعٌ سَوَاءٌ ‏.‏
Malik related to me that he had heard that Said ibn al-Musayyab spoke about a man who died and left three sons and left mawali whom he had freed. Then two of his sons died and left children. He said, "The third remaining son inherits the mawali. When he dies, his children and the children of his brothers share equally in the wala' of the mawali
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu DaifSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 38 · Setting Free and Wala'

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।