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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1433

नंबर 1433किताब 36, नंबर 35
وَحَدَّثَنِي مَالِكٌ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ يَمْنَعُ أَحَدُكُمْ جَارَهُ خَشَبَةً يَغْرِزُهَا فى جِدَارِهِ ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ يَقُولُ أَبُو هُرَيْرَةَ مَا لِي أَرَاكُمْ عَنْهَا مُعْرِضِينَ وَاللَّهِ لأَرْمِيَنَّ بِهَا بَيْنَ أَكْتَافِكُمْ ‏.‏
Malik related to me from Ibn Shihab from al-Araj from Abu Hurayra that the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, said, "No one should prevent his neighbour from fixing a wooden peg in his wall." Then Abu Hurayra said, "Why do I see you turning away from it? By Allah! I shall keep on at you about it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Judgements

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।