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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1405

नंबर 1405किताब 36, नंबर 7
وَحَدَّثَنِي مَالِكٌ، أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ شِهَابٍ، يُسْأَلُ عَنْ ذَلِكَ، فَقَالَ مِثْلَ مَا قَالَ سُلَيْمَانُ بْنُ يَسَارٍ ‏.‏ قَالَ مَالِكٌ وَذَلِكَ الأَمْرُ عِنْدَنَا وَذَلِكَ لِقَوْلِ اللَّهِ تَبَارَكَ وَتَعَالَى ‏{‏وَالَّذِينَ يَرْمُونَ الْمُحْصَنَاتِ ثُمَّ لَمْ يَأْتُوا بِأَرْبَعَةِ شُهَدَاءَ فَاجْلِدُوهُمْ ثَمَانِينَ جَلْدَةً وَلاَ تَقْبَلُوا لَهُمْ شَهَادَةً أَبَدًا وَأُولَئِكَ هُمُ الْفَاسِقُونَ * إِلاَّ الَّذِينَ تَابُوا مِنْ بَعْدِ ذَلِكَ وَأَصْلَحُوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَحِيمٌ‏}‏‏.‏ قَالَ مَالِكٌ فَالأَمْرُ الَّذِي لاَ اخْتِلاَفَ فِيهِ عِنْدَنَا أَنَّ الَّذِي يُجْلَدُ الْحَدَّ ثُمَّ تَابَ وَأَصْلَحَ تَجُوزُ شَهَادَتُهُ وَهُوَ أَحَبُّ مَا سَمِعْتُ إِلَىَّ فِي ذَلِكَ ‏.‏
Hadith Translation Not available
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Judgements

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।