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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1396

नंबर 1396किताब 35, नंबर 2
قَالَ مَالِكٌ إِنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ سُئِلَ عَنِ الشُّفْعَةِ هَلْ فِيهَا مِنْ سُنَّةٍ فَقَالَ نَعَمْ الشُّفْعَةُ فِي الدُّورِ وَالأَرَضِينَ وَلاَ تَكُونُ إِلاَّ بَيْنَ الشُّرَكَاءِ ‏.‏
Malik said, "That is the sunna about which there is no dispute among us." Malik said that he heard that Said ibn al-Musayyab, when asked about pre-emption and whether there was a sunna in it, said, "Yes. Pre-emption is in houses and land, and it is only between partners
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu DaifSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 35 · Pre-emption in Property

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।