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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1325

नंबर 1325किताब 31, नंबर 36
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، أَنَّهُ سَمِعَ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ، يَقُولُ لاَ رِبًا إِلاَّ فِي ذَهَبٍ أَوْ فِضَّةٍ أَوْ مَا يُكَالُ أَوْ يُوزَنُ بِمَا يُؤْكَلُ أَوْ يُشْرَبُ ‏.‏
Yahya related to me from Malik that Abu'z-Zinad heard Said ibn al-Musayyab say, "There is usury only in gold or silver or what is weighed or measured of what is eaten or drunk
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 31 · Business Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।