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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1320

नंबर 1320किताब 31, नंबर 31
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، أَنَّهُ بَلَغَهُ عَنْ جَدِّهِ، مَالِكِ بْنِ أَبِي عَامِرٍ أَنَّ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ، قَالَ قَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ تَبِيعُوا الدِّينَارَ بِالدِّينَارَيْنِ وَلاَ الدِّرْهَمَ بِالدِّرْهَمَيْنِ ‏"‏ ‏.‏
Yahya related to me from Malik that he had heard from his grandfather, Malik ibn Abi Amir that Uthman ibn Affan said, "The Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, said to me, 'Do not sell a dinar for two dinars nor a dirham for two dirhams
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 31 · Business Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।