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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1306

नंबर 1306किताब 31, नंबर 17
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ عُمَرَ بْنَ عَبْدِ الْعَزِيزِ، قَضَى بِوَضْعِ الْجَائِحَةِ ‏.‏ قَالَ مَالِكٌ وَعَلَى ذَلِكَ الأَمْرُ عِنْدَنَا ‏.‏ قَالَ مَالِكٌ وَالْجَائِحَةُ الَّتِي تُوضَعُ عَنِ الْمُشْتَرِي الثُّلُثُ فَصَاعِدًا وَلاَ يَكُونُ مَا دُونَ ذَلِكَ جَائِحَةً ‏.‏
Yahya related to me from Malik that he had heard that Umar ibn Abd al-Aziz decided in a case to make a reduction for crop damage. Malik said, "That is what we do in the situation." Malik added, "Crop damage is whatever causes loss of a third or more for the purchaser. Anything less is not counted as crop damage
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu DaifSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 31 · Business Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।