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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 206

नंबर 206किताब 3, नंबर 39
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، أَنَّهُ سَأَلَ ابْنَ شِهَابٍ وَنَافِعًا مَوْلَى ابْنِ عُمَرَ عَنْ رَجُلٍ، دَخَلَ مَعَ الإِمَامِ فِي الصَّلاَةِ وَقَدْ سَبَقَهُ الإِمَامُ بِرَكْعَةٍ أَيَتَشَهَّدُ مَعَهُ فِي الرَّكْعَتَيْنِ وَالأَرْبَعِ وَإِنْ كَانَ ذَلِكَ لَهُ وِتْرًا فَقَالاَ لِيَتَشَهَّدْ مَعَهُ ‏.‏ قَالَ مَالِكٌ وَهُوَ الأَمْرُ عِنْدَنَا ‏.‏
Yahya related to me from Malik that he asked Ibn Shihab and Nafi, the mawla of Ibn Umar, whether a man who joined an imam who had already done a raka should say the tashahhud with the imam in the second and fourth rakas, even though these were odd for him? They said, "He should say tashahhud with him." Malik said, "That is the position with us
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 3 · Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।